बाबा रामदेव: राष्ट्र को समर्पित एक ज़िद्दी भारतपुत्र, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से योग आयुर्वेद को पूरे विश्व में पहुंचा दिया....

बाबा रामदेव कई बार भाषा की सीमा लाँघ जाते हैं या हल्का बोल जाते हैं, जो कि ठीक नहीं  हैं । परन्तु कुछ बातें ऐसी भी हैं जो निश्चित ही मील का पत्थर साबित हुआ है। 

हम सैकड़ों साल से स्वदेशी स्वदेशी चिल्लाते रहे, लेकिन हमारे पास विकल्प नहीं या बेहद कम थे। अच्छा - खराब अलग विषय है, और इसकी जाँच हमने कभी भी विदेशी कम्पनियों में भी नहीं की। बाबा ने हमें धीरे - धीरे स्वदेशी उत्पादों की एक श्रृंखला दी है, विकल्प दिया है कि हम बिना हिचक स्वदेशी उत्पाद चुन सकें। स्वदेशी के गीत गाने वाले अनेक संगठन आज तक ऐसा नहीं कर पाए थे। परम्परागत वैद्य दवाइयों को कूट - पीस कर पुड़िया बना कर देते थे, जिसमें क्या है किसी को कुछ पता नहीं होता था। साथ ही उनका ज्ञान सदैव सीमित लोगों तक पहुंचा और प्रायः वो अगली पीढ़ी तक अपना ज्ञान अग्रेसित नहीं कर सके। जबकि बाबा ने उसको आधुनिकीकरण और मशीनों के द्वारा allopathy की तरह टैबलेट - कैप्सूल, सिरप का रूप दिया है, जिसकी उपलब्धता सहज और खाना आसान हुआ है। आचार्य बालकृष्ण ने एक औषधीय वनस्पतियों का संकलन तैयार किया है जिसमें 6,000 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का सचित्र विवरण उपलब्ध है। जो अपने आप में एक बड़ा योगदान है। गुरुकुल परम्परा को पालन करने और वेद, सांख्य दर्शन के साथ साथ योग, आयुर्वेद में निष्णात लाखों योगी तैयार करने का भागीरथ कार्य प्रारम्भ किया है जो अपने आप में अद्वितीय है। इसे सोचा बहुतों ने लेकिन कर कोई नहीं पाया, बड़े स्तर पर। हालांकि, इसका परिणाम आने वाले वर्षों में दिखेगा। आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्साशास्त्र के साथ खड़ा करने के लिए आधुनिक परीक्षण शालाएं बनाई। जिनमें अहर्निश अनुसंधान कार्य चलते हैं, डेटा एकत्र किए जाते हैं और नवीन औषधियों के सूत्र खोजे जाते हैं।

आज एलोपैथी में जहाँ हम 500-1000 रु तक फीस देकर डॉक्टर को दिखाते हैं, वहीं पतंजलि ने लाखों डॉक्टर बिना शुल्क उपलब्ध कराए हैं, जो पतंजलि से इतर भी दवाएँ लिखते हैं। योग-आसन और प्राणायाम को सहज रूप में प्रस्तुत कर भारत के घर घर ही नही दुनियां भर में पहुँचा दिया, जिससे कोई अनभिज्ञ नहीं है। स्वदेशी व्यापार का बड़ा मॉडल खड़ा कर के दिखा दिया है कि केवल मठों में दण्ड पेलने और दान के राशन से पेट भरने और चाँदी के सिंहासन पर बैठने भर से समाज का उत्थान नहीं होगा। समाज के बीच उतर कर राष्ट्रवाद, स्वास्थ्य और स्वदेशी की भावना लोगों में जगाने का बीड़ा स्वयं उठाने से देश समाज में परिवर्तन आएगा। और वो कर दिखाया है इसमें कोई संशय नहीं है। बाबा रामदेव आज भी एक लँगोटी और भगवा वस्त्र में भूमि शयन करते हैं। उनके नैतिक जीवन की शुचिता पर कोई दाग नहीं है, जो कि धन और वैभव मिलते ही प्रायः बड़े बड़े तथाकथित सन्यासी भूल जाते हैं। 

जिस महान कार्य को श्री राजीव दीक्षित जी ने पूरे भारतवर्ष में गांव गांव जाकर किया, उस महान स्वदेशी अभियान को ही आगे बढ़ाने का कार्य बाबा रामदेव जी के द्वारा किया जा रहा है।

शेष, मनुष्य कोई भी परिपूर्ण नहीं होता है। सभी में कुछ कमियाँ होती हैं परन्तु हमें आधा भरा गिलास देखना है और आशान्वित रहना ही श्रेयस्कर है। लड़ाई किसी पैथी या विधा से नहीं है। सब का अपना अपना महत्व है, परन्तु लॉबी बना कर किसी पैथी को जबरन हतोत्साहित करना या दबाना भी ठीक नहीं है जो कि IMA करना चाहती है। 

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने स्वदेशी के महान पुरोधा स्व. श्री राजीव दीक्षित जी की सपनों को पूरा करने का अथक प्रयास किया है जो कि प्रशंसनीय है।

    स्वदेशी आंदोलन के अमर बलिदानी राजीव भाई दीक्षित जी




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