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सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर में धूमधाम से मनाया गया होली मिलन समारोह, अबीर ग़ुलाल से किया गया होली का स्वागत

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कोटालपोखर ब्रेकिंग: यूं तो होली है   रंग, अबीर, ग़ुलाल का रंग बिरंगा खुशियों भरा त्यौहार। जब बात खुशियाँ मनाने की आए तो कौन भला ऐसा अवसर से पीछे हटना चाहेगा। रंग बिरंगी होली का स्वागत करने के लिए आज शनिवार को सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर के प्रांगण में होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। जिसमें प्रधानाचार्य श्री तुलसीमंडल जी ने बताया कि होली एक प्रेम उत्साह का पर्व है, जिसमें बुराई पर अच्छाई का जीत होती है। इसके बाद सभी भैया - बहनों ने सभी आचार्यों को गुलाब, अबीर लगाकर आशीर्वाद लिए। इसके बाद सभी भैया - बहन आपस में गुलाल अबीर लगाकर काफी उत्साहित दिखे। होली मिलन समारोह में प्रधानाचार्य तुलसी मंडल जी, आचार्य विकास चंद्र साह, अनुप लाल रजक, भीम घोष, विप्लव सिंह, रोहित साहा, प्रिया भारती, सुषमा जी सभी उपस्थित रहे ।

हिन्दू समाज ने वैसे भी होली खेलना कम कर दिया था, लेकिन........

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हिन्दू समाज ने वैसे ही होली खेलना कम कर दिया था। फिर तथाकथित लिबर्ल्स को अचानक कीड़ा ने काटा, उन्होंने पानी बचाओ ज्ञान दे दिया। परिणाम:- पिछले दो वर्ष से हिन्दू समाज इतनी जमकर होली खेल रहा है कि लिबर्ल्स को धोने का भी पानी कम पड़ गया।  हिन्दू समाज ने वैसे ही दीपावली पर पटाखे फोड़ना कम कर दिया था। लिबर्ल्स को कीड़ा काटा पटाखे बैन करवा दिए। परिणाम:- पिछले वर्ष हिंदुओ ने इतने जमकर पटाखे फोड़े कि लिबर्ल्स का इंजन धुंआ धुंआ हो गया। हिन्दू समाज ने वैसे ही शिवालयों में अभिषेक करना कम कर दिया था। लिबर्ल्स को कीड़ा काटा दो बूंद दूध पर ज्ञान दे दिया। परिणाम:  हिन्दू समाज अब ऐसा दिल खोलकर अभिषेक कर रहा है कि लिबर्ल्स की फिल्में देखना बन्द कर दी। लिबर्ल्स कलाकार दो बूंद सफलता के लिए तरस गए।  हिन्दू समाज ने वैसे ही दीपावली पर दीपक जलाना कम कर दिया था। वह आर्टिफिसियल लाइटिंग कर रहा था। लिबर्ल्स को कीड़ा काटा तेल बचाने का ज्ञान दे दिया। परिणाम: पिछले वर्ष हिंदुओ ने दीपावली पर इतने दीपक प्रज्वलित किये कि कुम्हारों के घर रोशन हो गए और लिबर्ल्स के ग्लेशियर पिघल गये। ये नया हिन्दू समाज है जो अ...

जन्माष्टमी के मौके पर सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर से आई बाल कृष्ण स्वरुप में बच्चों की शानदार तस्वीरें देखिए

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कोटालपोखर, बरहरवा:  सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में कल बुधवार को कृष्ण और राधा रूप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिसमें कृष्ण रूप सज्जा मे भईया गौरव गुप्ता प्रथम स्थान और राधा रूप सज्जा में बहन अनुश्री प्रथम स्थान, बहन गुंजन कुमारी द्वितीय स्थान और रूही कुमारी एवं लवली साह तृतीय स्थान पर चयनित हुआ। विद्यालय में यह कार्यक्रम प्रतियोगिता बहुत ही शानदार रहा। यहां के भैया बहन, अभिभावक एवं आचार्य, आचार्या गण उल्लास में दिखे। बताते चलें कि सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर के प्रधानाचार्य श्री तुलसी मंडल जी जब से यहां जिम्मेदारी संभाले हैं, तब से आज तक विद्यालय हित में कई बेहतर कदम उठा चुके हैं। इन सकारात्मक प्रयासों से विद्यालय तेज गति से आगे बढ़ता दिख रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर शिक्षा, संस्कार तथा संस्कृति और अनुशासन के लिए चारों ओर जाना जाता है। क्या है श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व तथा इतिहास आइए जानते हैं:-  पुराणों के अनुसार सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलयुग इन चार युगों में समयकाल विभाजित है। द्वापर युग में युगपुरूष के रूप में असमान्य श...

कोटालपोखर में कल से आरम्भ होने जा रहा है श्रीराम कथा, सुबह धूमधाम से निकलेगी पावन कलशयात्रा: मीडिया प्रभारी

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साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड अंतर्गत कोटालपोखर गांव में कल 25 अप्रैल से श्री राम कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। कार्यक्रम मीडिया प्रभारी गोविंद कुमार साहा (पत्रकार) के अनुसार श्रीराम कथा का आयोजन, दिनांक 25 अप्रैल से लेकर 2 मई तक सात दिवसीय किया जाएगा। जिसमें मुख्य कथावाचक के रूप में देवी लक्ष्मीरानी एवं देवी राधा रानी जी होंगी। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन कराने हेतु श्रीराम कथा समिति बनाई गई है। जिसमें अध्यक्ष काली प्र साहा, सचिव जय प्रकाश साहा, कोषाध्यक्ष मधुसुदन साहा एवं अन्य सदस्यों को समिति एवं कार्यक्रम संभालने का दायित्व मिला है। इधर समिति सदस्यों ने क्षेत्रवासियों से यथासंभव सहयोग की अपेक्षा किया है ताकि कथा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो पाए। साथ ही बताते चलें कि कल सोमवार सुबह 7 बजे के लगभग उच्च विद्यालय मैदान से पावन कलश यात्रा झाँकी धूमधाम से निकाला जाएगा। क्षेत्रवासियों से आग्रह किया गया है कि सभी रामभक्त इस पावन कलशयात्रा में अवश्य भाग लें। पुरुषों के साथ साथ देवियां, कन्याएं जरूर सम्मिलित हों। कलश यात्रा एवं श्रीराम कथा आयोजन की सारी तैयारियां जोर शोर से चल रही है, ...

MS धोनी के झारखंड के इस गांव में 25 अप्रैल से भव्य रूप में होने जा रहा है श्री राम कथा का आयोजन: गोविंद कुमार साहा (मीडिया प्रभारी)

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झारखंड प्रदेश के साहिबगंज जिला अंतर्गत कोटालपोखर गांव में आगामी 25 अप्रैल से श्री राम कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस संदर्भ में कार्यक्रम मीडिया प्रभारी गोविंद कुमार साहा के अनुसार श्रीराम कथा का आयोजन दिनांक 25 अप्रैल से लेकर 2 मई तक सात दिवसीय किया जाएगा। जिसमें मुख्य कथावाचक के रूप में देवी लक्ष्मीरानी एवं देवी राधा रानी जी होंगी। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन कराने हेतु श्रीराम कथा समिति बनाई गई है। जिसमें अध्यक्ष काली प्र साहा को समिति एवं कार्यक्रम संभालने का दायित्व मिला। बताते चलें कि 2020 से ही रामकथा का आयोजन किए जाने के प्रयास चल रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसका आयोजन संभव नहीं हो सका था। चलिए खुशी की बात है कि इतने प्रयासों के बाद अब बड़े ही धूमधाम से श्री राम कथा का आयोजन होने जा रहा है जिससे कई दिनों तक राम नाम की धुन दूर दूर तक गूंजने वाली है। समिति सदस्यों ने क्षेत्रवासियों से यथासंभव सहयोग की अपेक्षा किया है ताकि कथा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो पाए। राम कथा का आयोजन होने से कोटालपोखर क्षेत्रवासियों में काफी हर्षोल्लास का माहौल है।

झारखंड के कोटालपोखर गांव के सनातनी राष्ट्रवादियों ने धूमधाम से मनाया भारतीय वैदिक नववर्ष 2079 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा)

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कल भारतीय नववर्ष के अवसर पर,  नई दुर्गा मंदिर - शान्ति चौक (कोटालपोखर) में उधवा के प्रसिद्ध वैदिक पुरोहित पंडित ज्ञानचंद आर्य द्वारा “वैदिक हवन यज्ञ कार्यक्रम" को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। हवन कार्यक्रम में मुख्य रूप से कार्यक्रम आयोजक गोविन्द कुमार साहा, प्रमुख सहयोगी श्री राजेश साहा, सहयोगी पप्पू कुमार साहा,  सहयोगी सुनील शेखर गुप्ता, हुरू आर्य जी, श्री रंजीत साहा, बप्पी साहा, सुनील साहा, गणेश आर्य, सत्यम आर्य, श्री शंकर माली, राजीव रंजन, शिवलाल रजवार साथ ही संस्कृति क्लासेज के छात्राएं भी उपस्थित हुई। कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु मुख्य रूप से राजेश साहा, नारायण यादव (फूलचुवा), भवेश साहा (डीपू रोड), राजेश साहा (गुरु मार्केट), अरुण साहा (मेडिकल), राजू साहा, परशुराम साहा (हिरणपुर) आदि जागरूक सामाजिक लोगों ने यथासंभव अपना सहयोग दिया। हवन के पश्चात, वैदिक पंडित ज्ञानचंद आर्य जी ने अपने उदबोधन में राष्ट्रहित, सनातन संस्कृति हित में समाज को सदैव तत्पर रहने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा- हमें सदैव सत्य का अनुसरण तथा असत्य के त्याग करने में आगे रहना चाहिए। आज हमारे समाज में अनेक ...

सारी दुनिया को सर्जरी की देन भारत ने दी, जानें आखिर क्या है इसका असली और अचंभित इतिहास....

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भारत में एक महान रिसर्चर और इतिहासकार हुआ-  राजीव दीक्षित ! उनकी खोज और दस्तावेजों के आधार पर ही हम जानते हैं कि कैसे विदेशियों ने हमसे प्लास्टिक सर्जरी सिखा। वैसे तो, आयुर्वेद के नियम को हजारों साल पहले ही आयुर्वेद चिकित्सा का रूप कुछ महान ऋषियों द्वारा दिया गया है। हमारा आयुर्वेद चिकित्सा में एक बड़े महान व्यक्ति हुए, जिनका नाम था महर्षि चरक । इन्होने सबसे ज्यादा रिसर्च इस बात पर किया कि जड़ी बूटियों से क्या क्या बीमारियाँ ठीक सकती है या पेड़ पौधों से कौन सी बीमारियाँ ठीक होती है। अथवा पेड़ों के पत्तों से कौन सी बीमारियाँ ठीक होती है। इन बिंदुओं पर, उन्होंने सबसे ज्यादा खोज किया। उनके बाद, एक ऐसे ही व्यक्ति हुए महर्षि शुश्रुत , उन्होंने इस विषय पर काम किया कि यदि शरीर के किसी भी अंग में जरुरत से ज्यादा ऐसी कोई बढ़ोतरी हो जाए, जैसे ट्यूमर या गाँठ हो गयी तो, इसे कैसे काट कर निकाला जाए। इस तरह, उन्होंने सर्जरी पर सबसे ज्यादा काम किया। आपको शायद ये जानकर आश्चर्य होगा और ख़ुशी भी होगी कि सर्जरी का अविष्कार इसी भारत देश में हुआ। यानी काफी समय बाद, सारी दुनिया ने सर्जरी भारत से सीखी। ब्रिटे...

बाबा रामदेव: राष्ट्र को समर्पित एक ज़िद्दी भारतपुत्र, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से योग आयुर्वेद को पूरे विश्व में पहुंचा दिया....

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बाबा रामदेव कई बार भाषा की सीमा लाँघ जाते हैं या हल्का बोल जाते हैं, जो कि ठीक नहीं  हैं । परन्तु कुछ बातें ऐसी भी हैं जो निश्चित ही मील का पत्थर साबित हुआ है।  हम सैकड़ों साल से स्वदेशी स्वदेशी चिल्लाते रहे, लेकिन हमारे पास विकल्प नहीं या बेहद कम थे। अच्छा - खराब अलग विषय है, और इसकी जाँच हमने कभी भी विदेशी कम्पनियों में भी नहीं की। बाबा ने हमें धीरे - धीरे स्वदेशी उत्पादों की एक श्रृंखला दी है, विकल्प दिया है कि हम बिना हिचक स्वदेशी उत्पाद चुन सकें। स्वदेशी के गीत गाने वाले अनेक संगठन आज तक ऐसा नहीं कर पाए थे। परम्परागत वैद्य दवाइयों को कूट - पीस कर पुड़िया बना कर देते थे, जिसमें क्या है किसी को कुछ पता नहीं होता था। साथ ही उनका ज्ञान सदैव सीमित लोगों तक पहुंचा और प्रायः वो अगली पीढ़ी तक अपना ज्ञान अग्रेसित नहीं कर सके। जबकि बाबा ने उसको आधुनिकीकरण और मशीनों के द्वारा allopathy की तरह टैबलेट - कैप्सूल, सिरप का रूप दिया है, जिसकी उपलब्धता सहज और खाना आसान हुआ है। आचार्य बालकृष्ण ने एक औषधीय वनस्पतियों का संकलन तैयार किया है जिसमें 6,000 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का सचित्र विवरण...