(बिना मास्क के दिखे ग्रामीण बैंक अधिकारी/कर्मचारी)
झारखंड प्रदेश: हमारे राज्य के साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड अंतर्गत कोटालपोखर पंचायत के वनांचल ग्रामीण बैंक में दिनांक 10 फरवरी को लगभग 12 बजे के करीब मैं अपने करीबी रिश्तेदार के दो छोटी बच्चियों/ छात्राओं की अकाउंट खुलवाने हेतु आवेदन फॉर्म लेने पहुंचा। पहले तो, ग्रामीण बैंक अधिकारी/कर्मचारी द्वारा फॉर्म देने में काफी आनाकानी किया गया, फिर काफी देर बाद फॉर्म अन्य व्यक्ति के हाथों भेजा गया। मैंने मास्क पहना हुआ था, परंतु अचानक गौर किया कि वहां मौजूद अधिकारी/ कर्मचारियों ने मास्क नहीं पहना है। इसपर मैंने उनसे मास्क पहनने के लिए आग्रह किया तो कैशियर साहब ने काफी बदतमजी से जवाब दिया कि “जो करना है कर लो, मुझे फर्क नहीं पड़ता और हम दूर में बैठे हैं हम मास्क नहीं पहनेंगे, जिस अखबार में छापना है छापो।" जबकि सरकारी बैंक अधिकारी/कर्मचारियों के देखादेखी में वहां उपस्थित किसी व्यक्ति ने मास्क नहीं पहना था। ऑफ कैमरा तो उन्होंने काफी बदतमीजी से बात किया, लेकिन मोबाइल कैमरा चालू होते ही उनके सुर एकदम बदल गए। फिर भी, वहां के अधिकारी ने मेरे तरफ आकर मोबाइल छीनने का प्रयास किया, शायद वीडियो डिलीट करने के मकसद से। सूत्रों के मुताबिक यह जानकारी मिली है कि इन अधिकारी/कर्मचारी द्वारा कोटालपोखर क्षेत्र के कई आम लोगों के साथ बैंक में मुझसे पहले भी काफी आनाकानी और अभद्रता किया गया है। वनांचल ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय अधिकारी का ध्यान आकर्षण करते हुए कहना है कि संबंधित विभाग द्वारा, ऐसे लापरवाह अधिकारी/कर्मचारियों के ऊपर कोविड नियमों के उल्लंघन करने के लिए तथा आम नागरिक से अभद्रता करने के लिए, उचित और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
साथ ही राज्य सरकार से सीधे तौर पे कुछ सवाल:
1.क्या मास्क केवल आम जनता के लिए है और इन सरकारी बाबुओं के लिए नहीं?
2. राज्य सरकार द्वारा बनाई कोविड नियमों को ठेंगा दिखाते ये बैंक कर्मचारी लोग, कार्रवाई कब?
3. इन सरकारी कर्मचारियों के मास्क ना पहनने के कारण, वहां उपस्थित कई लोगों ने मास्क नहीं पहना है, जिम्मेदार कौन?
4. इस महामारी में ये अधिकारी/ कर्मचारी आम जनता के जीवन के साथ किस प्रकार खिलवाड़ कर रहे हैं?
5. मास्क चेकिंग के दौरान, अगर आम जनता ने मास्क नहीं पहना हो तो जुर्माना तथा कार्रवाई अलग से, लेकिन इन सरकारी कर्मचारियों पर मास्क, कोविड नियमों के उल्लंघन पे कार्रवाई कब तक होगी?
6. सरकारी अधिकारी/कर्मचारी तो जनता के सेवक होते हैं लेकिन इस मामले में फॉर्म लेने गए व्यक्ति (मैं स्वयं) के साथ इतनी अभद्रता क्यों? एक स्वतंत्र पत्रकार के साथ इतनी बदतमीजी तो सामान्य नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार होता होगा?
7. कोरोना महामारी में, अगर मास्क अनिवार्य है तो ये सभी क्यूं नहीं पहने हैं और पहनने के लिए बोलने पर, इतना ज्यादा भड़के क्यों?
8. कोविड नियमों की धज्जियां उड़ाते सरकारी बैंक कर्मचारी/अधिकारी क्या अब सरकार और कानून व्यवस्था से भी ऊपर हो गए जो जरूरी नियम को नहीं मान रहे हैं?
(कैमरा अथवा अन्याय के विरुद्ध उठाई गई मेरी आवाज को बंद करवाने हेतु मोबाइल छीनने का प्रयास करते वनांचल ग्रामीण बैंक कोटालपोखर के अधिकारी/कर्मचारी)
- स्वतंत्र पत्रकार गोविन्द कुमार साहा की विशेष आपबीती एवं रिपोर्ट प्रमाण के साथ