जन्माष्टमी के मौके पर सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर से आई बाल कृष्ण स्वरुप में बच्चों की शानदार तस्वीरें देखिए

कोटालपोखर, बरहरवा: सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में कल बुधवार को कृष्ण और राधा रूप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिसमें कृष्ण रूप सज्जा मे भईया गौरव गुप्ता प्रथम स्थान और राधा रूप सज्जा में बहन अनुश्री प्रथम स्थान, बहन गुंजन कुमारी द्वितीय स्थान और रूही कुमारी एवं लवली साह तृतीय स्थान पर चयनित हुआ। विद्यालय में यह कार्यक्रम प्रतियोगिता बहुत ही शानदार रहा। यहां के भैया बहन, अभिभावक एवं आचार्य, आचार्या गण उल्लास में दिखे। बताते चलें कि सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर के प्रधानाचार्य श्री तुलसी मंडल जी जब से यहां जिम्मेदारी संभाले हैं, तब से आज तक विद्यालय हित में कई बेहतर कदम उठा चुके हैं। इन सकारात्मक प्रयासों से विद्यालय तेज गति से आगे बढ़ता दिख रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर शिक्षा, संस्कार तथा संस्कृति और अनुशासन के लिए चारों ओर जाना जाता है।



क्या है श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व तथा इतिहास आइए जानते हैं:- पुराणों के अनुसार सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलयुग इन चार युगों में समयकाल विभाजित है। द्वापर युग में युगपुरूष के रूप में असमान्य शक्तियों के साथ श्री कृष्ण ने भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी को रोहणी नक्षत्र में मध्यरात्री में कंश के कारागृह में जन्म लिया। कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है अतः हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष को जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। भविष्य पुराण में इस व्रत के सन्दर्भ में उल्लेख है कि जिस घर में यह देवकी-व्रत किया जाता है वहां अकाल मृत्यु, गर्भपात, वैधव्य, दुर्भाग्य तथा कलह नहीं होती। जो एक बार भी इस व्रत को करता है उसे श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।



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