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हमारे क्षेत्र के ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की दादागिरी, मास्क नहीं पहनेंगे लेकिन बदतमीजी जरूर करेंगे.....

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(बिना मास्क के दिखे ग्रामीण बैंक अधिकारी/कर्मचारी) झारखंड प्रदेश: हमारे राज्य के साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड अंतर्गत कोटालपोखर पंचायत के वनांचल ग्रामीण बैंक में दिनांक 10 फरवरी को लगभग 12 बजे के करीब मैं अपने करीबी रिश्तेदार के दो छोटी बच्चियों/ छात्राओं की अकाउंट खुलवाने हेतु आवेदन फॉर्म लेने पहुंचा। पहले तो, ग्रामीण बैंक अधिकारी/कर्मचारी द्वारा फॉर्म देने में काफी आनाकानी किया गया, फिर काफी देर बाद फॉर्म अन्य व्यक्ति के हाथों भेजा गया। मैंने मास्क पहना हुआ था, परंतु अचानक गौर किया कि वहां मौजूद अधिकारी/ कर्मचारियों ने मास्क नहीं पहना है। इसपर मैंने उनसे मास्क पहनने के लिए आग्रह किया तो कैशियर साहब ने काफी बदतमजी से जवाब दिया कि “जो करना है कर लो, मुझे फर्क नहीं पड़ता और हम दूर में बैठे हैं हम मास्क नहीं पहनेंगे, जिस अखबार में छापना है छापो।" जबकि सरकारी बैंक अधिकारी/कर्मचारियों के देखादेखी में वहां उपस्थित किसी व्यक्ति ने मास्क नहीं पहना था। ऑफ कैमरा तो उन्होंने काफी बदतमीजी से बात किया, लेकिन मोबाइल कैमरा चालू होते ही उनके सुर एकदम बदल गए। फिर भी, वहां के अधिकारी ने मेरे तरफ...

Facebook: भारतीय मूल के इस युवा ने बनाया था फेसबुक, धोखे से मार्क जुकरबर्ग ने चुराया था इनकी आइडिया और फिर हुआ कुछ ऐसा कि जानकर चौंक जाएंगे आप?

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अगर कोई आपसे पूछे की फेसबुक का फाउंडर कौन है तो आपका जवाब मार्क जुकरबर्ग होगा। सिर्फ आप ही नहीं बल्कि अधिक्तर लोगों का जवाब मार्क जुकरबर्ग ही होगा। लेकिन माफ़ कीजियेगा आपकी ये जानकारी सही नहीं है। फेसबुक के लिए पागल भारतीयों को ये नहीं मालुम की फेसबुक का असली फाउंडर एक भारतीय है। आप यह जानकर हैरान रह जायेंगे की फेसबुक का असली फाउंडर मार्क जुकरबर्ग नहीं बल्कि अप्रवासी भारतीय दिव्य नरेन्द्र है।  दिव्य नरेन्द्र अप्रवासी भारतीय है और इनके माता-पिता काफी लम्बे समय से अमेरिका में रह रहे है। महज 29 साल के दिव्य नरेन्द्र ने हार्वर्ड में अपनी पढ़ाई के दौरान फेसबुक का निर्माण किया था, लेकिन जुकरबर्ग की वजह से उनको इसका क्रेडिट नहीं मिला। दरअसल फेसबुक का जन्म हार्वर्ड सोशल कनेक्शन सोशल साईट के निर्माण के दौरान हुआ था। जिस पर दिव्य नरेन्द्र बहुत दिनों से काम कर रहे थे। इस प्रोजेक्ट में मार्क जुकरबर्ग सिर्फ मौखिक सहयोग के लिए थे। लेकिन जुकरबर्ग ने फेसबुक प्रोजेक्ट को चालाकी से हाईजैक कर लिया। इतना ही नहीं उसने डोमेन नेम को भी धोखे से अपने नाम रजिस्टर्ड कर लिया। जिसके बाद दिव्य नरेन्द्र और जुकरबर...

वीर महाराणा प्रताप जी ने इस मुगल राक्षस को अपने तलवार से चीर दिया था, हल्दीघाटी युद्ध में।

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  डरपोक अकबर ने 7 फ़ीट 8 इंच के बहलोल खान को भेजा था महाराणा प्रताप का सर लाने। क्यूंकि कभी नहीं हारा था, बहलोल खान । मुगली अकबर का सबसे खतरनाक माना जाता था, यह दानव रूपी व्यक्ति। कहते हैं कि हाथी जैसा बदन था इसका और ताक़त का जोर इतना कि नसें फटने को होती थीं।ज़ालिम इतना कि तीन दिन के बालक को भी गला रेत-रेत के मार देता था, बशर्ते वो हिन्दू का हो। एक भी लड़ाई कभी हारा नहीं था,अपने पूरे जीवन में ये बहलोल खां। कहा जाता है कि घोडा उसने सामने छोटा लगता था, इतनी लंबाई था उसका। चौड़ा और ताकतवर था वह खां, अकबर को बहलोल खां पर खूब नाज था। लूटी हुई औरतों में से बहुत सी बहलोल खां को दे दी जाती थी। फिर हल्दीघाटी का युद्ध हुआ। अकबर और महाराणा प्रताप की सेनाएं आमने सामने थी। अकबर, महाराणा प्रताप से बहुत डरता था, इसलिए वो खुद इस युद्ध से दूर रहा। अब इसी बहलोल खां को अकबर ने भिड़ा दिया, हिन्दू-वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप से ! अफीम के ख़ुमार में डूबी हुई सुर्ख नशेड़ी आँखों से भगवा अग्नि की लपट सी प्रदीप्त रण के मद में डूबी आँखें टकराईं और जबरदस्त भिडंत शुरू हुई। कुछ देर तक तो राणा यूँ ही मज़ाक सा खे...

अपने बच्चियों को ऐसे आत्मरक्षा सिखाइए सिर्फ डांस नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो !

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सारी दुनिया को सर्जरी की देन भारत ने दी, जानें आखिर क्या है इसका असली और अचंभित इतिहास....

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भारत में एक महान रिसर्चर और इतिहासकार हुआ-  राजीव दीक्षित ! उनकी खोज और दस्तावेजों के आधार पर ही हम जानते हैं कि कैसे विदेशियों ने हमसे प्लास्टिक सर्जरी सिखा। वैसे तो, आयुर्वेद के नियम को हजारों साल पहले ही आयुर्वेद चिकित्सा का रूप कुछ महान ऋषियों द्वारा दिया गया है। हमारा आयुर्वेद चिकित्सा में एक बड़े महान व्यक्ति हुए, जिनका नाम था महर्षि चरक । इन्होने सबसे ज्यादा रिसर्च इस बात पर किया कि जड़ी बूटियों से क्या क्या बीमारियाँ ठीक सकती है या पेड़ पौधों से कौन सी बीमारियाँ ठीक होती है। अथवा पेड़ों के पत्तों से कौन सी बीमारियाँ ठीक होती है। इन बिंदुओं पर, उन्होंने सबसे ज्यादा खोज किया। उनके बाद, एक ऐसे ही व्यक्ति हुए महर्षि शुश्रुत , उन्होंने इस विषय पर काम किया कि यदि शरीर के किसी भी अंग में जरुरत से ज्यादा ऐसी कोई बढ़ोतरी हो जाए, जैसे ट्यूमर या गाँठ हो गयी तो, इसे कैसे काट कर निकाला जाए। इस तरह, उन्होंने सर्जरी पर सबसे ज्यादा काम किया। आपको शायद ये जानकर आश्चर्य होगा और ख़ुशी भी होगी कि सर्जरी का अविष्कार इसी भारत देश में हुआ। यानी काफी समय बाद, सारी दुनिया ने सर्जरी भारत से सीखी। ब्रिटे...

बाबा रामदेव: राष्ट्र को समर्पित एक ज़िद्दी भारतपुत्र, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से योग आयुर्वेद को पूरे विश्व में पहुंचा दिया....

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बाबा रामदेव कई बार भाषा की सीमा लाँघ जाते हैं या हल्का बोल जाते हैं, जो कि ठीक नहीं  हैं । परन्तु कुछ बातें ऐसी भी हैं जो निश्चित ही मील का पत्थर साबित हुआ है।  हम सैकड़ों साल से स्वदेशी स्वदेशी चिल्लाते रहे, लेकिन हमारे पास विकल्प नहीं या बेहद कम थे। अच्छा - खराब अलग विषय है, और इसकी जाँच हमने कभी भी विदेशी कम्पनियों में भी नहीं की। बाबा ने हमें धीरे - धीरे स्वदेशी उत्पादों की एक श्रृंखला दी है, विकल्प दिया है कि हम बिना हिचक स्वदेशी उत्पाद चुन सकें। स्वदेशी के गीत गाने वाले अनेक संगठन आज तक ऐसा नहीं कर पाए थे। परम्परागत वैद्य दवाइयों को कूट - पीस कर पुड़िया बना कर देते थे, जिसमें क्या है किसी को कुछ पता नहीं होता था। साथ ही उनका ज्ञान सदैव सीमित लोगों तक पहुंचा और प्रायः वो अगली पीढ़ी तक अपना ज्ञान अग्रेसित नहीं कर सके। जबकि बाबा ने उसको आधुनिकीकरण और मशीनों के द्वारा allopathy की तरह टैबलेट - कैप्सूल, सिरप का रूप दिया है, जिसकी उपलब्धता सहज और खाना आसान हुआ है। आचार्य बालकृष्ण ने एक औषधीय वनस्पतियों का संकलन तैयार किया है जिसमें 6,000 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का सचित्र विवरण...

हमारे देश में किसानों की हालत आज कुछ ऐसा है- हमें तो अपनों ने लुटा, गैरों में कहां दम था.....

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 कृषि प्रधान कहे जाने वाले देश में किसान बनना आज के दौर में अभिशाप बन गया है।   हमारे देश के महापुरुषों ने कहा है कि किसान पूरी मानवता का पालक है । लेकिन जो मानवता का पालक है, वही आज आत्महत्या करने को बेबस है।  आजादी से आज तक इन 74 सालों में, सभी पार्टियों ने किसानों के ऊपर अपने तरीके से जबरदस्त राजनीति किया। लेकिन किसी ने किसानों का सही मायने में विकास नहीं किया। अगर विकास किया होता तो आज किसान मरता नहीं । आए दिन हम सुनते हैं कि इस अमुक राज्य में इतने किसान भाइयों ने आत्महत्या कर लिया। कोई फसल खराब होने की वजह से, कोई कर्ज नहीं चुका पाने के कारण से तो कोई खाद की महंगाई जैसे कारणों की वजह से अधिकतर किसान आत्महत्या करते हैं ।  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में करीब 43,000 किसानों और दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की ।  आजादी से लेकर आज तक इन 74 सालों में एक अधिकारी की आय में 200 % की वृद्धि, एक सरकारी शिक्षक की आय में 210 % की वृद्धि, सांसद - विधायकों के आय में 200 % की वृद्धि। लेकिन एक किसान की आय में मात्र 21 % की वृद...